पूरा मामला यह है कि तत्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन द्वारा वर्ष 2018–19 में अपने पूरे कार्यकाल में जगदीश बंसल एवं उसके पूरे परिवार को व्यक्तिगत रंजिश रखते हुए विधि विरुद्ध नोटिस प्रेषित कर शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और परेशान न करने के फलस्वरूप 05 लाख रुपये की अवैध राशि की मांग की गई थी, जिसके कारण बंसल द्वारा एक वैधानिक नोटिस बर्मन को प्रेषित की गई। नोटिस प्राप्ति के 01 सप्ताह के अंदर बर्मन द्वारा व्यक्तिगत रंजिश एवं नोटिस प्राप्ति से आगबबूला होकर बंसल के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करवाकर उसे जेल भेज दिया गया। उक्त एफ.आई.आर. को विधि विरुद्ध पाते हुए मा० सुप्रीम कोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया, तब बंसल द्वारा बर्मन के विरुद्ध व्यक्तिगत रंजिश एवं बदले की भावना, अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग करने के संबंध में की गई विधि विरुद्ध एफ.आई.आर. के फलस्वरूप हुई ख्याति एवं प्रतिष्ठा, आर्थिक नुकसान को लेकर 01 करोड़ रुपये का मामला बर्मन के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय एवं उच्च न्यायालय से असफलता मिलने पर बंसल द्वारा मा० सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में बर्मन के विरुद्ध 01 करोड़ रुपये मानहानि स्वरूप दिलाये जाने के संबंध में एस.एल.पी. प्रस्तुत की गई। दिनांक 13.10.2026 को प्रस्तुत उक्त एस.एल.पी. को स्वीकार करते हुए मा० सुप्रीम कोर्ट ने बर्मन सहित अन्य 02 को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने हेतु आदेशित किया गया है। यहां यह लिखना भी लाजमी होगा कि बंसल द्वारा बर्मन के विरुद्ध और भी बहुत से मामले निम्न न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय में लंबित चल रहे हैं। बहुत से प्रकरण बंसल के पक्ष में निराकृत भी हो चुके हैं। कमिश्नर एवं राजस्व मण्डल सहित अन्य न्यायालयों ने अपने आदेशों में बर्मन के विरुद्ध गंभीर टिप्पणियां की हैं। बर्मन द्वारा बंसल के आलीशान कार्यालय को भी विधि-विरुद्ध तरीके से तोड़ दिया गया था। इस संबंध में राजस्व मण्डल ने उक्त निर्माण को बंसल की निजी जमीन पर पाते हुए बंसल को मुआवजा प्राप्त करने का अधिकारी ठहराया है। बर्मन द्वारा बंसल की पत्नी हेमलता के विरुद्ध भी विधि-विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करायी गयी थी, जो अभी मा० सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उक्त प्रकरण में बंसल की ओर से रविन्द्र श्रीवास्तव, अंशुमान एवं अभिजीत श्रीवास्तव न्यायालय में उपस्थित रहे।