अधिकारियों की मनमानी से फिर बिगड़ रही कचहरी चौक में ट्रैफिक व्यवस्था!





शक्तिनगर में जब से जिले का गठन हुआ है तब से अधिकारियों एक तरफा तानाशाही चल रही है जब भी जैसा भी मन होता है जब वैसे नियम बनाकर इसे लागू कर देते हैं आम जनता उसने क्या बोलना पड़ेगा इससे उनको कोई सरोकार नहीं रहता एसडीएम कार्यालय जहां सभी न्यायालय ,तहसीलदार कार्यालय ,नायब तहसीलदार कार्यालय,तथा जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में मौजूद है वहां का दरवाजा बंद करवा दिया जाता है कि कोई भी बाहरी अपना वाहन लेकर अंदर ना जा सके जबकि अंदर परिसर में काफी वाहन खड़ी करने की व्यवस्था है इतने कार्यालय होने के कारण उस स्थान पर हजारों लोगों का हर दिन दिन आना जाना होता है और उल्लेखनीय है की थाने का मुख्य द्वार भी बंद कर दिया गया है नजदीक ही पुलिस थाना भी है जिसमें भी सैकड़ों लोगों का रोज आना जाना होता है उनके लिए भी वाहन खड़ा करने की समस्या होती है साथ ही साथ आसपास में कई पाठशाला है अधिकारी और वीआईपी तो बड़े मजे से गाड़ी को पर अपने परिसर के अंदर खड़ी कर लेते हैं परंतु आम जनों पर वाहन खड़े करना अत्यंत ज्यादा दूभर हो जाता है क्योंकि किसी दुकान यह किसी के सामने खड़े करने पर उन से वाद-विवाद की स्थिति होती है वाहन पार्किंग के लिए जो स्थान बनाए गए हैं वह वाहनों की व्यवस्था के अनुसार अत्यंत कम है बहुत वहां बहुत कम वाहनों के खड़े करने की व्यवस्था है और अगर किसी दुकान या प्रतिष्ठान के सामने में कोई कोई वाहन खड़ा करता है तो उस दुकानदार के साथ में वाहन चालक का विवाद होता है मजबूरी में नागरिकों को और पक्षकारों को अपने वाहन को लावारिस कहींभी छोड़कर जाना पड़ता है जिससे चोरी का डर लगातार बने रहता है परंतु इन अधिकारियों को इन सब चीजों से कोई सरोकार नहीं है उन्हें तो बस अपनी जिद्दी पूर्ण कर नियम बनाने हैं और लागू करने हैं ऐसा ही एक बड़ा फैसला इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर भी हुआ था जब अत्यंत विरोध के बावजूद अधिकारियों ने अपनी जिद पूरी करने के लिए गणतंत्र दिवस कार्यक्रम को जेठा में ही करवा कर अपनी जिद पूरी की !हम यह नहीं कहते कि किसी प्रकार के नियम नहीं बनना चाहिए परंतु अगर कोई नियम बनाया जाता है तो उस से उत्पन्न समस्या का समाधान की तरफ ध्यान देना अधिकारियों का पहला कार्य है समस्या का समाधान करें फिर नियम बनाए तब लोग भी सारे नियमों का पालन करेंगे और शासन प्रशासन का सम्मान भी करेंगे

