शक्ति:नगर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए चलाए जा रहे बंध्याकरण अभियान में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आ रहा है। नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे इन ऑपरेशनों और उसके बाद बरती जा रही उदासीनता के कारण स्थिति बेकाबू होती जा रही है, जिससे न केवल बेजुबान जानवर भारी कष्ट झेल रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों और अन्य पशुओं की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट मंडरा रहा है।
अभियान के नाम पर दर्दनाक लापरवाही
प्रशासन द्वारा शहर में कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए उन्हें पकड़कर उनका बंध्याकरण किया जा रहा है। पहचान सुनिश्चित करने के लिए उनके कान का एक हिस्सा काटा जा रहा है। प्रक्रिया के बाद कुत्तों को बिना किसी उचित चिकित्सीय देखभाल, दवा या पोस्ट-ऑपरेटिव केयर (देखभाल) के सीधे वापस सड़कों पर छोड़ दिया जा रहा है।देखभाल के अभाव में इन ऑपरेशनों के घाव समय पर नहीं सूख पा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनमें गंभीर संक्रमण (इन्फेक्शन) फैल रहा है।घावों में पड़ने वाले संक्रमण और लगातार बनी रहने वाली पीड़ा के कारण ये बेजुबान जानवर अत्यधिक आक्रामक व्यवहार करने लगे हैं।
असहनीय दर्द से जूझते हुए ये कुत्ते कई स्थानों पर अन्य मवेशियों पर और कुछ जगह इंसानों पर भी हमला कर रहे हैं, जिससे शहर के लोगों में दहशत का माहौल है।इस अमानवीय स्थिति और बढ़ते खतरे को लेकर स्थानीय नागरिकों एवं पशु प्रेमियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के तहत बंध्याकरण के बाद कुत्तों को पूरी तरह स्वस्थ होने तक सुरक्षित आश्रय में रखकर उनकी देखभाल करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
शहरवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस अभियान में पारदर्शिता लाई जाए, घायल और संक्रमित कुत्तों का तत्काल समुचित इलाज कराया जाए तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए इस प्रक्रिया को मानवीय रूप से संचालित किया जाए।

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